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Moral Stories in Hindi for Kids- सातवी कक्षा मे पढ़नेवाले विद्यार्थी यों के लिए खास प्रेरक कहानीया

Moral Stories in Hindi - प्रेरक कहानिया


the moral stories in hindi  short for class 5,6, 7 


we have carefully analyzed the difficulty level of classes 5,6, 7 students and chosen moral stories in hindi . we have tried to keep all moral stories in hindi short and simple. we present all moral stories in hindi with pictures. these stories help students to learn life lessons. Students can understand the humanity and values of our life.

moral-stories-in-hindi-for-class-7

हम  इस पोस्ट के जरिए स्कूल मे 7 वी कक्षा (moral stories in hindi ) मे पढ़नेवाले वाले बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक बोधपर- प्रेरक कहानिया लाए है। उसके साथ हर एक कहानी की सिख यानि मॉरल ऑफ द स्टोरी भी दिया गया है। जिससे बच्चे कहानी से कुछ अच्छा सिख सकते है।  साथ मे कार्टून और चित्रों से कहानियों को सजाया गया है जिससे बच्चों की रुचि बनी रहेगी। 

इस पृष्ट पर मौजूद प्रेरक कहानियों की सूची :- moral stories in hindi for class 7


१. दो लालची चोर और बुढ़िया की कहानी- moral stories in hindi for class 7


2. एक किसान प्रेरक  कहानी- moral stories in hindi for class 7


३. अमिर और गरीब दोस्तों की कहानी- moral stories in hindi for class 7


४. आत्मनिर्भरता मनुष्य को सफल बनाती है- moral stories in hindi for class 7


५. . सच्चा दोस्त- moral stories in hindi for class 7 


६. कर्म कर के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए- moral stories in hindi for class 7


७. एक जमींदार और लालची पत्नी की कहानी-moral stories in hindi for class 7


८. . चोरी करोगे तो सजा जरुर मिलेगी- moral stories ion hindi for class 7


९. स्वार्थी बाप और दो नन्हे बच्चे-moral stories in hindi for class 7


10. बुरे का अंजाम बुरा होता है- moral stories in hindi for class 7


moral story in hindi

१. दो लालची चोर और बुढ़िया की कहानी


एक गांव बलपुर में दो चोर अजय और विजय साथ रहते थे। दोनों एक किराए के घर में रहते थे। उन दोनों के पास कुछ काम नहीं था इसलिए दोनों अलग अलग नगर में चोरी किया करते थे और जो भी माल मिलता था, उसे आपस में बांट लिया करते थे।
दोनों थे तो मित्र पर स्वार्थी भी बहुत थे । दोनों केवल अपने मतलब के बारे में सोचते थे। एक बार दोनों ने एक बैंक को लूटने की योजना बनाई। अगली सुबह दोनों एक बैंक को लूटने निकल पड़ते है। वे अपने साथ पिस्तौल ओर चाकू रख लेते है ताकि इनकी मदद से आसनी से बैंक को लूटने में कामयाब हो जाते हैं। इसकी खबर पूरे गांव ओर पुलिस को पड़ जाती है। पुलिस के डर से दोनों गांव से बहुत दूर एक जंगल में चले जाते है।दोनों अपने साथ कुछ खाने पीने का समान भी रख लेते है। दोनों जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठ कर देखते हैं कि उन लोगों के पास अब कितना माल हो गया है। दोनों देखते हैं उनके पास काफी धन हो गया है।
उनके पास इतना माल हो गया था कि उन्हें अब चार पांच महीने चोरी करने की जरूरत न थी। बहुत सारा धन देखकर अजय की नियत खराब हो जाती है। वह सारा धन खुद रखना चाहता है। इसलिए वह विजय को मार देने की योजना बनाता है। विजय को जंगल में एक कुएं के पास ले जाता है ओर विजय को धक्का दे देता है , जिससे विजय की मौत हो जाती है। उसके बाद अजय सारा धन लेकर एक नगर में चला जाता है। वहां वह एक बूढ़ी औरत से मिलता है। बूढ़ी औरत उसे बताती है कि उसके पास बहुत सारा धन है पर उसका कोई संतान नहीं है इसलिए वह एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जिसको वह अपना सारा धन दे सके।अजय उससे बोलता है आप अपना सारा धन मुझे दे दें। बूढ़ी औरत एक बहुत बड़े घर की नौकरानी है।
वह अजय को अपने मालिक के घर ले जाती है। घर बहुत बड़ा था, जिसे देखकर अजय खुश हो जाता है। वह अजय को बैठने बोलती है।वह उसके लिए भोजन बनती है जिसमें वह जहर मिला देती है ।उसके बाद अजय को खिला देती है । जिसे खाकर अजय की भी मौत हो जाती है।और सारा धन वह औरत अपने पास रख लेती है। कुछ दिनों बाद उस बुढ़िया का बहुत ज्यादा तबीयत खराब हो जाता है उस बूढ़ी के घर पर कोई नहीं था और बूढ़ी मर जाती है और सारा माल उसी घर में रह जाता है।

MORAL OF THE STORY - इस कहानी की सिख :-
लालची इंसान कभी सुखी नहीं रह सकता है, ज्यादा लालच मनुष्य की जिंदगी बर्बाद कर देता है। 



२. एक किसान प्रेरक  कहानी- moral stories in hindi


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अंकित के पिताजी आसमान कि तरफ देख के कह रहे थे कि पता नहीं ये बारिश कब होगी। फसल लगाने का वक़्त भी बीतता जा रहा है । राशन दुकान का कर्जा भी ज्यादा हो गया है। फसल होगी तभी अनाज बेच के पैसे मिलेंगे। और कर्ज से भी छुटकारा मिलेगा। पास की कुंवे से वो पानी निकालने चले गए। पानी लाकर गाय और बैलो को पिलाया , और गांव की ढाबे की ओर चल दिए।
गांव से शहर 10 किलोमीटर की दूरी पर था।अक्सर शहर में कोई काम के लिए मजदूर ढूंढने के लिए गांव के ढाबे पे आता था। अंकित के पिताजी , ढाबे पे बैठे थे कि कोई शहर से काम के लिए के आया। कुछ देर बैठने के बाद एक आदमी बाइक में आया और उनसे पूछा, शहर में एक मकान बन रहा है क्या आप मजदूरी का काम करेंगे। अंकित के पिताजी तुरंत तैयार हो गए । और उनके साथ बाइक में बैठ के काम के लिए चले गए। शाम में काम खत्म होने पे , ठेकेदार ने उन्हें दैनिक मजदूरी दी।
वो पैसे लेकर , ऑटो में बैठ कर गांव वापस आ गए। अगले दिन अंकित के पिता जी ऑटो से शहर जाने लगे और काम खत्म करके शाम में घर वापस आ जाते थे। इन्हें पैसे से घर का खर्च चल रहा था। अंकित भी बारिश के इंतेजार में अपने खेत को तैयार करने में लगा हुआ था। रात में जब अंकित के घर में सभी लोग खाना खा के सोने चले गए तब इस रात जोर से बिजली चमकने और बादल कड़कने के आवाज से उनकी नींद टूट गई। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। अंकित और उसका पूरा परिवार भगवान का सुक्र अदा कर रहा था और बहुत खुश था, सुबह चारो तरफ पानी ही पानी था। अंकित अपने पिताजी के साथ कुदाल लेकर खेत की तरफ चल देता है।
खेत में पानी भरा हुआ था। अगले दिन खेत के जुताई करके उसमे फसल लगा देता है। और फसल के अच्छे होने की उम्मीद में खेत में मेहनत करने लगता है। 3 महीने में फसल तैयार हो जाता है। अंकित अपने पिता के साथ अपनी फसल को बाजार में बेचने जाता है। और उससे फसल के अच्छे पैसे मिलते है। उनसे वो कर्जा चुकाता है और घर के लिए कुछ सामान लेता है। इस साल अच्छे दाम मिले , कुछ पैसे से अंकित के पिताजी 3 गाय खरीदते है और उनका दूध बेच कर अच्छा मुनाफा भी कमाने लगते है।


moral of the story - सिख- 
जिंदगी हमेश कठिन समय से गुजरती हैं लेकिन इंसान को हमेशा मेहनत करनी चाहिए, मेहनत से ही इंसान कठिनाइयोको मात दे सकता है। 




३. आमिर और गरीब दोस्तों की कहानी -moral stories in hindi short


रोहन नाम का एक लड़का था। वह पढ़ने के लिए शहर जाता है, और एक अच्छे से विद्यालय में नामांकन करवा लेता है। रोहन बहुत गरीब था। इसीलिए वह दूसरों के घरों में काम करता था और पैसों का इंतज़ाम करता था जिससे वह अपनी पढ़ाई का खर्च उठाता था। विद्यालय में उसके बहुत से सहपाठी थे जिनमें बहुत से गरीब तथा अमीर परिवार के बच्चे थे। जो गरीब परिवार के बच्चें थे उनके साथ बहुत भेदभाव किया जाता था।
रोहन का एक मित्र सोहन था। सोहन बहुत अमीर था। सोहन शुरू में तो रोहन के साथ बहुत अच्छे से रहता है और उसके साथ भेदभाव भी नहीं करता परंतु कुछ दिनों बाद सोहन में रोहन के साथ भेदभाव करना शुरू कर देता है।जिससे रोहन बहुत दुःखी होता है, और विद्यालय छोड़ देता है। कुछ दिनों बाद वह अपने गांव वापस आ जाता है, और गांव के विद्यालय में ही पड़ना शुरू के देता है। वह बहुत मेहनत करता है।
उसे एक बहुत अच्छा नौकरी भी मिल जाती है। वह बहुत मेहनत और लगन से काम करता है और एक अमीर आदमी बन जाता है। एक दिन वह सोहन से मिलने के बारे में सोचता है। अगले दिन वह सोहन के घर जाता है। वहां जाकर वह देखता है की सोहन बहुत दुःखी है। वह सोहन से उसके दुखी होने का कारण पूछता है। सोहन उसे बताता है कि उसकी मां बहुत बीमार है पर उनके इलाज के लिए उसके पास पैसे नहीं है। यह सब सुनकर रोहन उसकी मां के इलाज का खर्च उठाने के लिए तैयर जो जाता है।
सोहन यह सब सुनकर बहुत खुश होता है। सोहन ने बहुत पहले रोहन के साथ अमीर और गरीब को लेकर बहुत बुरा बर्ताव किया था। यह सब सोचकर उसे बहुत बुरा लगता है और उसे एहसास हो जाता है कि किसी के साथ अमीर और गरीब को लेकर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
सोहन अपनी गलती के वजह से बहुत शर्मिन्दा महसुस करता है और रोहन से अपनी गलती की माफी मांग लेता है। रोहन उसे माफ कर देता है और सोहन की मां इलाज भी का देता है।


moral of the story - सिख- 
मनुष्य को पैसे का कभी घमंड नहीं करना चाहिए। 


४. आत्मनिर्भरता मनुष्य को सफल बनाती है - moral stories in hindi for class 7


सुमन ओर पुनम दो जुडवा बहने थी। इनकी एक बड़ी बहन प्रिया भी थी। ये तीनों बहने अपने दादा दादी के साथ रहती थी। इनके माता पिता पटना में रहते थे क्योंकी इनके पिताजी पटना में नौकरी करते थे। इनके माता पिता कुछ दिनों के लिए इनके पास रहने आते थे। प्रिया बहुत ही संस्कारी थी। वह हमेशा अपने से बड़ों की बाते मानती थी ओर हमेशा अनुशासन में रहती थी। वह अनुशासन और शिक्षा के महत्व को बहुत अच्छे से समझती थी परन्तु इसके विपरीत इसकी दोनों बहने अनुशासन और शिक्षा के महत्व को ज़रा भी नहीं समझती थी।


ये दोनों अपने से बड़ों का आदर भी नहीं करती थी।एक बार उनके माता पिता उनसे मिलने आते हैं और वे दोनों सुमन ओर पुनम का विद्यालय में नामांकन कराने का निर्णय लेते हैं। परंतु वेे दोनों विद्यालय नहीं जाना चहती क्योंकि वे सोचती है कि उनके पिताजी हमेशा उनके साथ रहेंगे और उनकी जरूरतों को पूरा करेंगे। लेकिन उनके पिताजी अपनी बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे इसलिए वे उन दोनों का विद्यालय में नामांकन करा देते हैं। परंतु सुमन ओर पुनम पढ़ाई में ध्यान नहीं देती है। इस वजह से वे दोनों अपनी कक्षा में उत्तीर्ण नहीं होती थी। इससे उनके पिताजी बहुत दुःखी थे। वे चाहते थे कि सुमन और पुनम कम से कम दसवीं कक्षा तक पढ़ लें। वे दोनों दसवीं में भी ध्यान नहीं देती है और दसवीं में भी असफल होती है।


चूंकि इनके सभी सहपाठी सफल होते हैं इस वजह से सुमन और पुनम को चारों तरफ से ताना सुनना पड़ता है जिससे वे दोनों बहुत दुःखी हो जाती हैं। उन दोनों को अपनी गलती का एहसास हो जाता है और वे दोनों अपने माता पिता से माफी मांग लेती है। दोनों पढ़ाई में ध्यान देती है, और दसवीं में सफलता प्राप्त करती है। उसके बाद आगे भी वे दोनों बहुत मेहनत करती है और अपनी बड़ी बहन की तरह ही आत्मनिर्भर बन जाती है।

moral of the story - सिख- 
हने हमेशा मेहनत करके आत्मनिर्भर रहना चाहिए, कभी गलती हुई तो उससे कुछ सीखकर हमे हमेशा सफलता की रह पर चलना चाहिए। 



५. सच्चा दोस्त -moral stories in hindi for class 6
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विक्की आज सुबह उठा और स्कूल के लिए तैयार होने लगा।मां नाश्ता ला के दी। नाश्ता किया और अपनी साइकिल निकाल स्कूल जाने लगा। विक्की के पिताजी ऑटो चलाते थे। विक्की नई साइकिल के लिए रोज घर में बोलता था। उसकी साइकिल पुरानी हो गई थी, हर दो दिन में साइकिल में कुछ ना कुछ खराबी हो जाती थी।

टायर भी पुरानी हो चुकी थी। विक्की के पिताजी ऑटो चला के घर का खर्च पूरा करते थे। पर विक्की को अच्छे स्कूल में पढ़ने वेजते थे। स्कूल फीस और बुक्स में काफी खर्च होता था। विक्की भी अपने घर की हालत समझता था। हमेशा साइकिल खराब होने के कारण विक्की स्कूल के पहुंचता था। कई बार रिपेयरिंग भी करवाई पर ज्यादा दिन तक साइकिल ठीक से नहीं चल पाती और खराब हो जाती थी। विक्की का एक दोस्त था रोहन पढ़ने में काफी तेज था। और विक्की अक्षर पढ़ाई में उससे लेता था। रोहन भी विक्की की पढ़ाई में मदद करता था। उस दिन स्कूल में एक नोटिस लगा कि स्कूल में स्पोर्ट्स होने वाला है।

जो भी स्टूडेंट्स पार्टिसिपेट करने चाहते है वो अपना नाम स्टाफ रूम में जा के दे सकता है। हर खेल के लिए अलग अलग प्राइज था। 100 मीटर दौड़ के लिए फर्स्ट प्राइज लैपटॉप था। सेकेंड प्राइज साइकिल था। विक्की ये नोटिस देख के खुश हो गया। वो दौड़ में हिस्सा लेने के लिए रोहन को कहने लगा कि चलो हम दोनों दौड़ में हिस्सा लेते है। दोनो कोई अपना नाम दर्ज कराने स्टाफ रूम में जाते है। रोहन स्पोर्ट्स में पहले भी हिस्सा ले चुका था। तब उसे प्राइज में स्पोर्ट्स जूते मिले थे। विक्की अब हर रोज रेस कि तयारी करने लगा। 20 दिन के बाद स्पोर्ट्स का दिन आ जाता है। सभी लोग ग्राउंड में चारो तरफ बैठे होते है।

विक्की ये सोचता है कि किसी तरह मै रेस में सेकेंड हो जाऊं और मुझे साइकिल मिल जाए। रेस में हिस्सा लेने वाले 17 स्टूडेंट्स होते है। स्पोर्ट्स सर रेस कि अनुमति देते है और रेस सुरु हो जाता है। सभी लोग पूरी मेहनत से रेस लगते है। विक्की सबको पीछे छोड़ते हुए सबसे आगे निकल जाता जाता है। और रेस पूरा हो जाता है। स्पोर्ट्स वाले सिर विक्की का हाथ उठा के कहते है फर्स्ट प्राइज, और रोहन का हाथ उठा कहते है सेकेंड प्राइज। विक्की रेस जीत के भी उदास था। उसे प्राइज में लैपटॉप मिला था। रोहन को प्राइज में साइकिल मिला था। रोहन ये जनता था कि विक्की ने साइकिल के लिए ये रेस में हिस्सा लिया ।

रोहन अपनी साइकिल विक्की को देते हुए कहता है क्यों ना हमलोग अपना प्राइज आपस में बदल ले। ये सुन के विक्की खुश हो जाता है। विक्की अपना लैपटॉप रोहन को दे देता है। विक्की नेई साइकिल ले के बहुत खुश था।

moral of the story - सिख- 

हमे हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए, उससेही हमे असली सुख और समाधान मिलता है। 



६. कर्म कर के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। moral stories in hindi for class 7

तन्नू नाम का एक लड़का था। वह बहुत ही संस्कारी और दयालु था। वह हमेशा दूसरों की मदद किया करता था।वह जब भी किसी ऐसे व्यक्ति को देखता था , जिसे किसी की मदद की जरूरत हो । वह उसकी मदद के लिए चला जाता था। एक दिन वह विद्यालय जाने के लिए घर से निकलता है । रास्ते में वह एक बूढ़ी औरत को देखता है। वह बहुत थकी हुई थी और उसके पास बहुत सारा सामान था।

जिसे वह थकावट के कारण उठाने नहीं सक रही थी। तन्नू उसके पास जाता है और उसे पानी पीने के लिए देता है और उसका सामान उठाकर बूढ़ी औरत के घर पहुंचा देता है। जिस कारण तन्नू विद्यालय देर से पहुंचता है । देर से पहुंचने के कारण उसे शिक्षक से डांट सुनना पड़ता है।

अगले दिन वह विद्यालय के लिए घर से जल्दी निकलता है ताकि वह विद्यालय समय से पहुंच सके। रास्ते में वह एक बच्चे को देखता है।वह बच्चा बहुत रो रहा था। तन्नू उसके पास जाकर उसके रोने का कारण पूछता है । वह बच्चा उसे बताता है कि वह अपने माता पिता के साथ एक मेले में घूमने गया था, जहां वह अपने माता पिता से बिछड़ गया। तन्नू उस बच्चे के माता पिता को ढूंढने में उसकी मदद करता है। तन्नू बच्चे को उस मेले में भी ले जाता है जहां वह अपने माता पिता से बिछड़ गया था।परंतु उसके माता पिता यहां नहीं मिलते है तब वह उस बच्चे को पुलिस स्टेशन ले जाता है। उसके बाद पुलिस बच्चे के माता पिता को ढूंढकर उन्हें सौंप देती है। बच्चे की मदद करने की वजह से वह उस दिन भी दोबारा विद्यालय देर से पहुंचता है। देर से पहुंचने की वजह से शिक्षक उससे बहुत नाराज़ हो जाते हैं और उसे विद्यालय से निकाल देते है। विद्यालय से निकल जाने के बाद वह उदास होकर अपने घर आ रहा होता है तभी उसे रास्ते में वह बच्चा मिलता है जिसकी उसने मदद की थी।

वह बच्चा अपने माता पिता के साथ था। बच्चे को उसके माता पिता के साथ देखकर तन्नू खुश हो जाता है। वह बच्चा अपने माता पिता को तन्नू के बारे में सबकुछ बता देता है। बच्चे के माता पिता तन्नू से पूछते हैं कि तुम विद्यालय से इतना जल्दी घर क्यों जा रहे हों ? तब तन्नू उन्हें बताता है कि उसे विद्यालय से निकाल दिया गया है क्योंकि वह देर से विद्यालय पहुंचा था। बच्चे के माता पिता तन्नू के साथ उसके विद्यालय जाते है और उसके देर से विद्यालय पहुंचने का कारण सभी शिक्षको को बताते हैं। कारण जानने के बाद तन्नू के शिक्षक बहुत प्रसन्न हो जाते है, और तन्नू को विद्यालय आने की अनुमति दे देते हैं।तन्नू को विद्यालय की तरफ से ईनाम भी दिया जाता है। 

moral of the story - सिख- 
 कर्म कर के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।




७. एक जमींदार और लालची पत्नी की कहानी।-moral stories in hindi for class 5


एक गांव में एक जमींदार रहता था । उसकी पत्नी का नाम सुरेखा था ।जमींदार और उसकी पत्नी बहुत ही अमीर थे। उनक पास पैसों की कोई कमी नहीं थी। जमींदार अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था परन्तु सुरेखा सिर्फ उसके दौलत से प्यार करती थी। जमींदार हमेशा गांव के जरूरतमंदो की मदद किया करता था, और महीने में एक बार उनलोगों के बीच अनाज का भी वितरण किया करता था। यह सब देख जमींदार की पत्नी को बहुत गुस्सा आता था ।

वह जमींदार के पूरे दौलत को हड़प लेना चहती थी। एक दिन वह सोचती है कि यदि जमींदार मर जाएगा तो पूरा दौलत उसका हो जाएगा। इसलिए वह उसे जान से मार देने की योजना बनाती है। एक दिन वह जमींदार के साथ गांव में घूमने निकलती है। सुरेखा जमींदार से कहती है उसे बहुत प्यास लगी है।

वे दोनों एक कुएं के पास जाते है । वहां आस पास किसी को न देखकर सुरेखा जमींदार की कुएं में धक्का दे देती है, और गांव के लोगों को जाकर बताती है कि जमींदार कुएं में गिर गया है। गांव वाले जमींदार को कुएं से बाहर निकालते है तब तक वह मर चुका होता है। गांव के सभी लोग जमींदार की मौत पर बहुत दुःखी होते हैं। चूंकि जमींदार की पत्नी ने उसकी हत्या की थी इसलिए उसके आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसलिए जमींदार गांव के लोगों को परेशान करने लगता है। एक दिन गांव वालें एक तांत्रिक को बुलाते हैं । तांत्रिक गांव वालों को बताता है कि जमींदार के आत्मा को शान्ति नहीं मिली है क्योंकि उसकी हत्या कि गई है।

उसकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब उसके हत्यारे की बलि दी जाएगी। जब ये बातें सुरेखा को पता चलता है तो वह गांव छोड़कर भाग जाती है। सुरेखा के गांव के भाग जाने से गांव वालों को सुरेखा के उपर संदेह होता है । जब वह बहुत दिनों तक गांव वापस नहीं आती है तब गांव वालों का संदेह यकीन में बदल जाता है। इसके बाद गांव के सभी लोग सुरेखा को ढूंढने लगते है। सुरेखा को जमींदार का नौकर ढूंढकर गांव ले आता है और उसकी बलि दे दी जाती है। सुरेखा की बलि देने के बाद जमींदारी आत्मा को शांति मिलती है , और जमींदार गांव वालों को परेशान करना बंद कर देता है।

moral of the story - सिख- 

बुरे कर्मों का फल एक न एक दिन भुगतना  पड़ता है। 



८. चोरी करोगे तो सजा जरुर मिलेगी। moral stories in hindi short

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किसी समय की बात है जब अचानक अकाल पड़ जाने के कारण सभी जानवर मरने लगे और इससे भयंकर बीमारी उत्पन्न हो गई इससे बहुत से लोगों की रोजगार बंद हो गई थी। उस समय सभी मार्केट और दुकानें बंद थे। ऐसे समय में शहर में चोरी कि घटनाएं बढ़ रही थी। मार्केट में रवि का कपड़े का दुकान था। अगले दिन पत चलता है कि रवि के कपड़े के दुकान में चोरी हो गया है। रवि घर से भागते हुए पुलिस स्टेशन जाता है और रिपोर्ट लिखवाता है। पुलिस दुकान में आ के देखती है कि सारा समान चोरी हो चुका है। पुलिस मार्केट में निगरानी करने लगती है कि इस अकाल में चोरी कौन कर रहा है

शहर में उस बीमारी के मरीजों की तादाद प्रतिदिन बढ़ रही थी। सरकार भी गंभीर थी। सड़क पर सिर्फ एम्बुलेंस का है आना जाना था। अगले दिन पता चलता है कि दूसरे इलाके में एक दुकान में फिर से चोरी हो गई है। पुलिस भी परेशान थी , चोरों का कुछ पता नहीं चल रहा था। अगले रात पुलिस मार्केट में घूम घूम के पहरा दे रही थी , और आने जाने वाले एम्बुलेंस को रोक के चेक भी कर रही थी। एक एम्बुलेंस वाहा से गुजरती है, एम्बुलेंस खाली थी। पुलिस उसे रोक के पूछती है।

ड्राइवर बताता है कि एक मरीज को लाने उनके घर जा रही है। पुलिस मरीज का पता पूछती है और आगे जाने दे देती है। पुलिस अगले पड़ाव पे पहरा दे रहे पुलिसवालों को इस एम्बुलेंस का नंबर देते है और उनसे कहती है उसका पीछा करने को। काफी देर गुजर जाता है पर पुलिस को कोई खबर नहीं मिलता। अगले स्टॉपेज वाले पुलिस को बताता है कि कोई एम्बुलेंस यहां से नहीं गुजरी है। पुलिस तुरंत चारो तरफ के रास्तों पे नाकाबंदी कर देती है। पुलिस को दूर से वहीं एम्बुलेंस आता हुआ दिखाई देता है।

पुलिस उसे चारो तरफ से घेर लेती है। ड्राइवर को बाहर निकाला जाता है। एम्बुलेंस के अंदर से चोरी का समान मिलता है जो आज उसने चुराया था। ड्राइवर और उसके दो साथी ने जुर्म कबुल कर लिया उसने बताया कि अकाल में उसका काम बंद हो गया है इसलिए एम्बुलेंस से चोरी करने का प्लान बनाया । चोरी के समान को बेच के पैसा कमाने के लिए ऐसा किया। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कार थाना ले जाती है।

moral of the story - सिख- 
बुरे कर्मों का फल बुराही  होता है। 




९. स्वार्थी बाप और दो नन्हे बच्चे की कहानी। moral stories in hindi for class 7

एक गांव में भोला नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसके दो बच्चे ओर एक पत्नी थी। वह बहुत स्वार्थी था, वह कभी अपने बच्चो ओर पत्नी के लिए अच्छा नहीं सोचता था। उसका स्वभाव बहुत ही चिडचिड़ा था। वह गांव के जमींदार के घर में नौकर था। भोला जमींदार के घर का सारा काम किया करता था। जमींदार उसे काम करने के बदले में चार हजार रूपए देता था। जिससे वह घर का राशन खरीदता था और अपनें बच्चो के पढ़ाई का खर्चा उठाता था।

रात में वह घर देर से थका हुआ पहुंचता था, और हर रोज अपनी पत्नी से लड़ाई करता था। एक दिन वह सोचने लगा कि उसके बच्चे ओर पत्नी उसके ऊपर सिर्फ एक बोझ हैं, ये सभी उसके लिए कुछ काम के नहीं हैं। इसलिए वह अपने बच्चों को स्कूल में नहीं पढ़ाने के बारे में सोचता है। सुबह जब उसके बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगते हैं तो वह उन्हें स्कूल जाने से मना कर देता है, और उनसे कहता है कि मैं तुम दोनों को नहीं पढ़ा सकता क्योंकि मैं तुमलोगों की पढ़ाई में अपने पैसे व्यर्थ नहीं करना चाहता। यह कहकर वह अपने काम पर चला जाता है।

रात में घर आने के बाद वह दोबारा सोचने लगता है कि यदि वह अपने दोनों बच्चों को जमींदार के घर पर काम करने के लिए ले जाएगा तो उसे ज्यादा काम भी नहीं करना पड़ेगा और पैसे भी आ जाएंगे। यह सोचकर सुबह वह अपने दोनों बच्चों को अपने साथ काम पर ले जाता है, और सारे काम अपने दोनों बच्चों से करवाता है। इससे उसकी पत्नी ओर बच्चे काफी निराश होते हैं। उसके बच्चे पढ़ लिखकर कुछ अच्छा काम करना चाहते है ताकि उनके पिताजी को जमींदार के घर पर काम न करना पड़े।
इसलिए भोला की पत्नी ओर बच्चे उसके घर को छोड़ने का निर्णय लेते हैं, और अगले दिन वे लोग घर छोड़कर रामपुर नामक एक गांव में चले जाते हैं। वहां भोला की पत्नी दूसरों के घरों में काम करके अपने बच्चों को पढ़ाती है। अंत में भोला को अपने गलती का एहसास होता है ओर अपने बच्चों और पत्नी से माफी मांग लेता है।

moral of the story - सिख- 
हमे अपनों के प्रति कभी स्वार्थ भावना नहीं दिखानी चाहिए, निस्वार्थ मन से ही हमे असली सुख का अहसास हो सकता है। 



१०. बुरे का अंजाम बुरा होता है- moral stories in hindi for class 5

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एक गांव में अजय और ऋतू दो भाई बहन अपने बूढ़े पिता की साथ रहते थे। उनका दो मंजिला मकान था। नीचे के कमरे में वो लोग रहते थे।और ऊपर की कमरे में किरायेदार रहते थे। अजय और ऋतू का परिवार किराए के पैसे से चल रहा था। जब पिताजी की तबियत ठीक थी तब पिताजी ने ज़मीन बेच के घर बनाई थी और बाकी ज़मीन पे खेती करके सब्जी उगाते और उनको बाज़ार में बेचा करते थे जिससे घर का खर्च चलता था। पर पिताजी जब से बीमार हुए है अनलोगो का घर खर्च सिर्फ मकान किराए से चलता था। उनके पास और कोई आमदनी का जरिया नहीं था। घर का खर्च पिताजी की दवाई और कॉलेज की फीस उसी से चलती थी।

उनके घर का किरायेदार के दिमाग में सैतानी खेल चल रहा था।वो पूरे घर पे कब्जा करना चाहता था। वो इस उम्मीद में था कि कब अजय की पिता की मौत हो और वो घर पे कब्जा करे। उनके गांव में एक अमीर आदमी रहता था । उसका बड़े शहरों में आना जाना रहता था। वो बहुत कम गांव म रहता था। एक दिन अजय किरायेदार की पास घर का किराया मांगने गया। किरायेदार ने बहाना बनाते हुए बोला की अभी तो मेरे पास पैसे नहीं है और मेरी तबियत भी ठीक नहीं है मै कुछ दिन बाद तुमको पैसा दे दूंगा। किरायेदार अपनी बीबी से कहा कि इस बूढ़े के मारने के बाद मै पूरे घर पे कब्जा कर लूंगा । उसकी बीबी बोली कि उनके बच्चे भी तो है। वो कहने लगा की उनके बच्चो को मै मानव तस्करों से बेच दूंगा । उसकी बीबी बोली अगर गांव में लोग पूछेंगे तो क्या बोलेंगे । वो कहने लगा कि बोल दूंगा कि उसका बेटा किसी लड़की के साथ भाग गया और बेटी किसी लड़के के साथ भाग गई। अचानक एक दिन अजय के पिता की बीमारी से मौत हो जाती है। मौक पाकर उनका किरायेदार अजय और ऋतू को अगवा करवा देता है। और पूरे घर पे कब्जा कर लेता है। जब अपहरणकर्ता दोनों को लेकर जा रहे थे तब उसका हाथापाई होता है और अजय और ऋतू वाहा से भाग जाते है । वो लोग एक दूसरे जगह पे रहने लगते है। अजय सोचता है कि अभी गांव जाऊंगा तो किरायेदार हमें फिर से अगवा करवा देगा।वो दोनों गांव से दूर एक जगह मे रहने लगते है । अजय और ऋतू एक होटल में काम करने लगते है। और एक छोटे से घर में किराए मे रहने लगता है। 

धीरे धीरे दिन बीतता है। अब अजय के पास अच्छे पैसे जमा हो जाता है । वो अपना गाव जाना चाहता है और अपना घर वापस पाना चाहता है। पर उसको समझ नहीं आता कि क्या करे। एक दिन उसके होटल में एक आदमी आया अजय ने ध्यान से देखा और उसे पहचान लिया , ये तो हमारे गांव का वो अमीर आदमी है जिसका गांव में बड़ा मकान है। अजय ने उसको अपनी सारी बात बताई। वो आदमी उसकी बात सुनने के बाद उसकी मदद करने को तैयार हो गया। उसने अजय से अगले दिन उसके रूम में आकर मिलने को कहा और अपना पता लिख के दिया । अगले दिन अजय और ऋतू उसके आवास पे जाते है। वो आदमी उनको लेके अपने वकील के पास जाता है और कुछ कानूनी कागज बनवाता है । जिसमे ये लिख होता है कि अजय का किराएदार उनके मकान पे गैरकानूनी कब्जा कर लिया है। वकील कोर्ट में केस फाइल करता है, और किरारायेदर को कोर्ट से नोटिस मिलता है। नोटिस पाकर किरायेदार घबरा जाता है, और अपना वकील के साथ वो भी कोर्ट में हाजिर हो जाता है। अजय के तरफ से वकील सारी सबूत पेश करता है कि गांव का मकान उसका है,और किरायेदार ने कब्जा कर रखा है। किरायेदार के पास कोई प्रूफ नहीं होता है। अजय कोर्ट में केस जीत जाता है। और उसका गांव का मकान उसको वापस मिल जाता है। किरायेदार और उसकी बीबी को कोर्ट से सजा मिलता है और जेल भेज दिया जाता है। अब अजय और ऋतू अपने पिताजी की मकान में रहने लगते है। एक दिन एक आदमी किराए के मकान के लिए अजय से उसके आवास में मिलता है। अब अजय होसियार हो चुका था कि किसी को किराया देने से पहले एक एग्रीमेंट पेपर पे ये लिख जाए कि ये मकान में आप सिर्फ एक किरायेदार है, भविष्य में कभी भी मकान पे दावा नहीं कर सकते। उसका एड्रेस प्रूफ फोटो और जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करवा के उसको अपने मकान में किराए पे रख लेता है। गांव के अमीर आदमी अजय को अपन साथ काम पे रख लेता है। और सभी लोग अच्छे से रहने लगते है।

moral of the story - सिख- 
बुरे कर्मों का फल भी बुरा ही मिलता है। 


11. ईमानदारी का इनाम- moral stories in hindi

इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया ....क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है !
पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !
बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है वो अभी इस साल काम दे सकते हैं!
अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा !
मैंने सोचा बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है !
खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा.....दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली ...डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी.....फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!!
मैंने बेटे से कहा :बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ?
बेटे ने कहा :पिता जी मुझे शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.......लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी ......पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा !
मैं खामोश रहा !!
घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा :तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे ने कहा: पिता जी मैं अक्सर देखता था कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पैर पैसे खर्च कर दिया करते हैं !
गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं, जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं.....
जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है.....मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते हैं !
पिता जी मैं चाहता हूँ कि मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिले या न मिले
लेकिन कोई आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे !!!!!
मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिता जी, आपकी कमजोरी नहीं !
बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था! आज मुझे पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!
आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे.



12. moral story-मशहूर चित्रकार


एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था । 
चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनाई 
और उसे नगर के चौराहे मे लगा दिया और 
नीचे लिख दिया कि जिस किसी को , 
जहाँ भी इस में कमी नजर आये 
वह वहाँ निशान लगा दे ।
 जब उसने शाम को तस्वीर देखी 
उसकी पूरी तस्वीर पर निशानों से ख़राब हो चुकी थी । 
यह देख वह बहुत दुखी हुआ । 


उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे 
वह दुःखी बैठा हुआ था ।
तभी उसका एक मित्र वहाँ से गुजरा 
उसने उस के दुःखी होने का कारण पूछा तो उसने उसे पूरी घटना बताई । 
उसने कहा एक काम करो 
कल दूसरी तस्वीर बनाना और 
उस मे लिखना कि 
जिस किसी को इस तस्वीर मे जहाँ कहीं भी कोई कमी नजर आये 
उसे सही कर दे । 
उसने अगले दिन यही किया । 
शाम को जब उसने अपनी तस्वीर देखी 
तो उसने देखा की तस्वीर पर किसी ने कुछ नहीं किया ।
वह संसार की रीति समझ गया । 
"कमी निकालना , निंदा करना , बुराई करना आसान है 
लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है।




13. moral stories for kids-  मित्रता



          उषा ने पति अनिल से कहा,कितनी देर तक समाचार पत्र पढ़ते रहोगे? यहाँ आओ और अपनी प्यारी बेटी को खाना खिलाओ। अनिल ने समाचार पत्र एक तरफ़ फेका और बेटी ईशा की और ध्यान दिया। बेटी की आंखों में आँसू थे और सामने खाने की प्लेट। ईशा एक अच्छी लड़की है और अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा समझदार. अनिल ने खाने की प्लेट को हाथ में लिया और ईशा से बोला,बेटी खाना क्यों नहीं खा रही हो?.आ जाओ मैं खिलाता हूँ . ईशा जिसे खाना नहीं भा रहा था। सुबक सुबक कर रोने लगी और कहने लगी,मैं पूरा खाना खा लूँगी पर एक वादा करना पड़ेगा आपको. वादा,अनिल ने बेटी को समझाते हुआ कहा,इस प्रकार कोई महँगी चीज खरीदने के लिए जिद नहीं करते. नहीं पापा,मैं कोई महँगी चीज के लिए जिद नहीं कर रही हूँ. फिर ईशा ने धीरे धीरे खाना पूर्ण किया और कहा,मैं अपने सभी बाल कटवाना चाहती हूँ. सभी प्रकारसे समाझाने पर भी ईशा नहीं मानी और अपना वचन निभाने हेतु ईशा की बात माननी ही पड़ी ।
           अगले दिन अनिल ईशा को स्कूल छोड़ने गया.वहां उसने उसी के आयु का एक गंजा बालक देखा जिसकी और ईशा भागते गयी थ. उसी समय एक महिला ने अनिल से कहा,क्या ईशा आपकी बेटी है ? बहुत ही होनहार लड़की है . मेरा बेटा कैंसर से पीड़ित है और इलाज में उसके सारे बाल खत्म हो गए हैं. वह् इस हालत में स्कूल नहीं आना चाहता था क्योंकि स्कूल में लड़के उसे चिढ़ाते हैं. पर ईशा ने कहा कि वह् भी गंजी होकर स्कूल आयेगी और वह् आ गई। 
          इस कारण देखिये मेरा बेटा भी स्कूल आ गया. आप धन्य हैं कि आपके ऐसी बेटी है अनिल को यह सब सुनकर रोना आ गया और उसने मन ही मन सोचा कि आज बेटी ने सीखा दिया कि प्यार क्या होता है. इस पृथ्वी पर खुशहाल वह् नहीं हैं जो अपनी शर्तों पर जीते हैं बल्कि खुशहाल वे हैं जो,जिन्हें वे प्यार करते हैं,उनके लिए बदल जाते हैं।



14. moral story in hindi- सच्चा प्रजपालक


          एक बार महाराजा अशोक के राज्य में अकाल पड़ा। जनता भूख तथा प्यास से त्रस्त हो उठी। राजा ने तत्काल राज्य में अन्न के भंडार खुलवा दिए। सुबह से लेने वालों का ताँता लगता और शाम तक न टूटता।
          एक दिन संध्या हो गई। जब सब लेने वाले निकट गए तो एक कृशकाय बूढ़ा उठा और उसने अन्न माँगा। बाँटने वाले भी थक चुके थे अतः उन्होंने उसे डाँटकर कहा-कल आना आज तो अब खैरात बंद हो गई।’’तभी एक हृष्ट-पुष्ट शरीर के नवयुवक जैसा व्यक्ति आया और बाँटने वालों से बोला-बेचारा बूढ़ा है। मैं देख रहा हूँ बड़ी देर से बैठा है यह। 
          शरीर से दुर्बल होने के कारण सबसे पीछे रह गया है। इसे अन्न दे दो।’’उसकी वाणी में कुछ ऐसा प्रभाव था कि बाँटने वालों ने उसे अन्न दे दिया। उस नवयुवक की सहायता से उसने गठरी बाँध ली। अब उठे कैसे? तब वही युवक बोला-लाओ मैं ही पहुँचाए देता हूँ।’’ और गठरी उठाकर पीछे-पीछे चलने लगा।बूढ़े का घर थोड़ी दूर पर रह गया था। तभी एक सैनिक टुकड़े उधर से गुजरी। टुकड़ी के नायक ने घोड़े पर से उतर कर गठरी ले जाने वाले का फौजी अभिवादन किया। 
          उस व्यक्ति ने संकेत से आगे कुछ बोलने को मना कर दिया। फिर भी बूढ़े की समझ में कुछ-कुछ आ गया। वह वहीं खड़ा हो गया और कहने लगा-आप कौन हैं,सच-सच बताइए।’’ वह व्यक्ति बोला-मैं एक नौजवान हूँ और तुम वृद्ध हो,दुर्बल हो। बस इससे अधिक परिचय व्यर्थ है। चलो बताओ तुम्हारा घर किधर है।’’ पर अब तक बूढ़ा पूरी तरह पहचान चुका था। वह पैरों में गिर गया और क्षमा माँगते हुए बड़ी मुश्किल से बोला-प्रजापालक आप सच्चे अर्थों में प्रजापालक हैं।’’ 




15. moral story for kids- जैसी करणी वैसे भरणी



          एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर रहने गया । उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोरहो चुका था ,उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था । वो एक छोटेसे घर में रहते थे ,पूरा परिवार औरउसका चार वर्षीया पोता एक साथ भोजन टेबल पर खाना खाते थे । लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कतहोती थी । कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।
          बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी ।“हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”,लड़के ने कहा । बहुने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली ,” आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा रहेंगे ,और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते ।”अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया ,अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था । यहाँ तक की उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था ,ताकि अब और बर्तन ना टूट -फूट सकें । बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी-कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते । 
          यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता ,वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते ।वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता ,और अपने में मस्त रहता । एक रात खाने से पहले ,उस छोटे बालक को उसके माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा ,”तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने पूछा ,बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया ,“ अरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें ।” ,और वह पुनः अपने काम में लग गया । पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत गहरा असर हुआ ,उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे । वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है । उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये ,और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया ।   


16. moral story in hindi-एक किसान




एक गाँव मे एक किसान रहता था। उसके परिवार मे उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालो के बाद पत्नी मृत्यु हो गई। उस समय लड़के की उम्र दस साल थी। किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ। किसान की दुसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।
किसान का बड़ा बेटा, जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था, जब शादी के योग्य हुआ, तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी। फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।

किसान का छोटा बेटा, जो दुसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनो साथ साथ रहते थे। कुछ टाईम बाद किसान के छोटे लड़के की तबयीत खराब रहने लगी। बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैद्य से ईलाज करवाया पर कोई राहत ना मिली। छोटे भाई की दिनभर तबीयत बिगड़ी जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था।
एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह की यदि ये छोटा भाई मर जाऐ तो हमे इसके ईलाज के लिऐ पैसा खर्च ना करना पड़ेगा।

तब उसकी पत्नी ने कहाँ की क्यो न किसी वैद्य से बात करके इसे जहर दे दिया जाऐ। किसी को पता भी ना चलेगा। कोई रिश्तेदारी मे भी शक ना करेगा कि बीमार था बीमारी से मृत्यु हो गई।
बड़े भाई ने ऐसे ही किया एक वैद्य से बात करी कि आप अपनी फीस बातओ, ऐसा करना मेरे छोटे भाई को जहर देना है।

वैद्य ने बात मान ली और लड़के को जहर दे दिया और लड़के की मृत्यु हो गई। उसके भाई भाभी ने खुशी मनाई कि रास्ते का काँटा निकल गया। अब सारी सम्पति अपनी हो गई। उसका अंतिम संस्कार कर दिया। कुछ महीनो पश्चात उस किसान के बड़े लड़के की पत्नी को लड़का हुआ। उन पति पत्नी ने खुब खुशी मनाई। बड़े ही लाड प्यार से लड़के की परवरिश की। समय के साथ लड़का जवान हो गया। उन्होने अपने लड़के की शादी कर दी।

शादी के कुछ समय बाद अचानक लड़का बीमार रहने लगा। माँ बाप ने उसके ईलाज के लिऐ बहुत वैद्यों से ईलाज करवाया। जिसने जितना पैसा माँगा दिया।सब दिया की लड़का ठीक हो जाऐ। अपने लड़के के ईलाज मे अपनी आधी सम्पति तक बेच दी पर लड़का बिमारी के कारण मरने की कागार पर आ गया। शरीर इतना ज्यादा कमजोर हो गया की अस्थि पिजंर शेष रह गया था।

एक दिन लड़के को चारपाई पर लेटा रखा था और उसका पिता साथ मे बैठा अपने पुत्र की ये दयनीय हालत देख कर दुःखी होकर उसकी और देख रहा था।
तभी लड़का अपने पिता से बोला की भाई अपना सब हिसाब हो गया बस अब कफन और लकड़ी का हिसाब बाकी है उसकी तैयारी कर लो। ये सुनकर उसके पिता ने सोचा की लड़के का दिमाग भी काम ना कर रहा है बीमारी के कारण और बोला बेटा मै तेरा बाप हूँ, भाई नही। तब लड़का बोला मै आपका वही भाई हुँ जो आप ने जहर खिलाकर मरवाया था। जिस सम्पति के लिऐ आप ने मुझे मरवाया, अब वो मेरे ईलाज के लिऐ आधी बिक चुकी है। आधी आपकी की शेष है। हमारा हिसाब हो गया। तब उसका पिता फुट फुट कर रोते हुए बोला की मेरा तो कुल नाश हो गया। जो किया मेरे आगे आ गया पर तेरी पत्नी का क्या दोष है जो इस बेचारी को जिन्दा जलाया जाऐगा(उस समय सतीप्रथा थी जिसमे पति के मरने के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था)। तब वो लड़का बोला की वो वैद्य कहाँ है जिसने मुझे जहर खिलाया था। तब उसके पिता ने कहा की आप की मृत्यु के तीन साल बाद वो मर गया था।

तब लड़के ने कहा की ये वही दुष्ट वैद्य आज मेरी पत्नी रुप मे है। मेरे मरने पर इसे जिन्दा जलाया जाऐगा।
परमेश्वर कहते है कि कर्मों का लेखा यहीं भुगत के जाना होता है। इस लिए कोई भी बुरा काम करते हुए एक बार सोच विचार कर लिया करो।



17. moral stories in hindi for kids-एक पंडित


एक नगर मे रहने वाले एक पंडित जी की ख्यातिदूर दूर तक थी पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था.एक बार वह अपने गंतव्य की और जानेके लिए बस मे चढ़े उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गएकंडक्टर ने जब किराया काटकर रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा उन्हें दे दिए है।

पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूँगाकुछ देर बाद मन मे विचार आया की बेवजह दस रुपये जैसी मामूली रकम को लेकर परेशान हो रहे है आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों कमाते है बेहतर है इन रूपयो को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए वह इनका सदुपयोग ही करेंगे।

मन मे चल रहे विचार के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया बस मे उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा भाई तुमने मुझे किराए के रुपये काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे।

कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी हो?
पंडित जी को हामी भरने पर कंडक्टर बोला मेरे मन मे कई दिनों से आपके प्रवचन सुनने की इच्छा है आपको बस मे देखातो ख्याल आया कि चलो देखते है कि मैं ज्यादा पैसे लौटाऊँ तो आप क्या करते हो, अब मुझे पता चल गया की आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है जिससे सभी को सिख लेनी चाहिए।
ये बोलकर कंडक्टर ने गाड़ी आगे बड़ा दी

पंडित जी बस से उतरकर पसीना-पसीना थे उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर भगवान से कहा है प्रभु तेरा लाख-लाख शुक्र है जो तूने मुझे बचा लिया मैने तो दस रुपये के लालच मे तेरी शिक्षाओ की बोली लगा दी थी पर तूने सही समय पर मुझे थाम लिया....!



18. हीरा व्यापारी- moral satory


एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था । किन्तु किसी गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्युहो गयी । अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया ।
जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने कहा, “बेटा , मरने से पहले तुम्हारे पिताजी ये पत्थर छोड़ गए थे, तुम इसे लेकर बाज़ार जाओ और इसकी कीमतका पता लगाओ | लेकिन ध्यान रहे कि तुम्हे केवल कीमत पता करनी है, इसे बेचना नहीं है |”

युवक पत्थर लेकर निकला, सबसे पहले उसे एक सब्जी बेचने वाली महिला मिली | 
”अम्मा, तुम इस पत्थर के बदले मुझे क्या दे सकती हो ?”, युवक ने पूछा |
”देना ही है तो दो गाजरों के बदले मुझे ये दे दो | तौलने के काम आएगा |”- सब्जी वाली बोली ।
युवक आगे बढ़ गया । इस बार वो एक दुकानदार के पास गया और उससे पत्थर की कीमत जानना चाही ।
दुकानदार बोला, ” इसके बदले मैं अधिक से अधिक 500 रूपये दे सकता हूँ, देना हो तो दो नहीं तो आगे बढ़ जाओ” |

युवक इस बार एक सुनार के पास गया, सुनार ने पत्थर के बदले 20 हज़ार देने की बात की | 
फिर वह हीरे की एक प्रतिष्ठित दुकान पर गया वहां उसे पत्थर के बदले 1 लाख रूपये का प्रस्ताव मिला | 
और अंत में युवक शहर के सबसेबड़े हीरा विशेषज्ञ के पास पहुंचा और बोला,” श्रीमान , कृपया इस पत्थर की कीमत बताने का कष्ट करें” |

विशेषज्ञ ने ध्यान से पत्थर का निरीक्षण किया और आश्चर्य से युवक की तरफ देखते हुए बोला, ”यह तो एक अमूल्य हीरा है | करोड़ों रूपये देकर भी ऐसा हीरा मिलना मुश्किल है” |

यदि हम गहराई से सोचें तो ऐसा ही मूल्यवान हमारा मानव जीवन भी है | यह अलग बात है कि हम में से बहुत से लोग इसकी कीमत नहीं जानते और सब्जी बेचने वाली महिला की तरह इसे मामूली समझ तुच्छ कामो में लगा देते हैं ।




19. moral stories for class 7-दुर्भाग्य का मुकाबला


          लगभग ढाई सौ साल पहले की घटना है। जापान में हवाना होकीची नामक एक बालक का जन्म हुआ। सात वर्ष की उम्र में चेचक के कारण बालक की आंखों की रोशनी चली गई। अब उसके जीवन में बिल्कुल अंधेरा हो गया था। 
          कुछ दिनों तक तो होकीची इस दुर्भाग्यपूर्ण परिवर्तन को समझ नहीं पाया। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते रहे, वैसे-वैसे होकीची ने अपनी परिस्थति से समझौता कर लिया और मन में ठान लिया कि किसी भी कीमत पर हार नहीं माननी है। बालक ने पढ़ना आरंभ किया। धीरे-धीरे उसे पुस्तकों से गहरा प्रेम हो गया। पुस्तकें ही होकीची की आंखें थीं, जो उसे जीवन की राह दिखाती थीं। वह पुस्तकों को दूसरों से पढ़वा कर ज्ञान अर्जित करता था। आजीवन उसने अपना अध्ययन जारी रखा। दूसरों से पुस्तकें पढ़वा-पढ़वा कर होकीची का ज्ञान भंडार असीमित हो चुका था। फिर उन्होंने अपने ज्ञान को एक पुस्तक के रूप में समेटना चाहा। जब यह बात एक राष्ट्रीय संस्था को मालूम हुई तो उसने होकीची के ज्ञान को पुस्तक रूप में लिखवाया।
          होकीची ने बोलकर संपूर्ण पुस्तक को लिखवा दिया। राष्ट्रीय संस्था को हवाना होकीची द्वारा लिखवाई गई पुस्तक अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आई। उसने उसके आधार पर एक विश्वज्ञान कोश प्रकाशित किया। यह विश्वज्ञान कोश दो हजार आठ सौ बीस खंडों में प्रकाशित हुआ। विश्व इतिहास में आज तक इससे अधिक तथ्यपूर्ण पुस्तक संभवतः कोई प्रकाशित नहीं हुई। होकीची ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने जीवन को एक सार्थक मोड़ पर पहुंचाया और आत्मविश्वास के बल पर एक सौ एक वर्ष तक जिंदा रहे। उन्होंने अपनी शारीरिक कमी को अपनी ताकत बनाकर अपने दुर्भाग्यपूर्ण जीवन को महान बना लिया। उनका जीवन दूसरों के लिए एक मिसाल बन गया। उन्होंने साबित किया कि संकल्प से हर तरह की मुश्किलों को आसान बनाया जा सकता है।




20.moral story-एक बहुरूपिया


एक बहुरूपिया था वह तरह तरह के रूप बना कर लोगों का मनोरंजन किया करता था। उसके मनोरंजन करने से लोगों का उत्साह बढ़ता और लोग खुशी खुशी उसे कुछ धन दे दिया करते। उसकी भी जीविका अच्छी चलती रहती थी। जब जब विशेष त्यौहार होते तो पर्व के देवी देवताओं के अनुरूप स्वांग बना कर विशेष लोकमनोरंजन करता।

जैसे जन्माष्टमी के पर्व पर श्रीकृष्ण का स्वांग बनाकर बाँसुरी के स्वरों में श्रीकृष्ण के भजनों की धुन पर स्वयं पैरों में नूपुर के साथ नृत्य के आल्हाद में रम जाने से मोहल्ले-मोहल्ले की रौनक तो बढ़ती ही, मनोरंजन भी होता। परन्तु इससे भी अधिक पर्व का आनंद कई गुना बढ़ जाता और दक्षिणा के रूप में उसे धन भी खूब प्राप्त होता।लोग उसका देवी-रूप या देवता-रूप में उसी तरह पूजन-अर्चन भी करते, और चढ़ावा भी खूब चढाते।

कुछ लोगों बहुरूपिये से ईर्ष्या होने लगी। ईर्ष्यावश लोगों ने राजा के कान भरने शुरू कर दिए।एक बार राजा ने बहुरूपिए को बुलाया और उसे शेर का रूप बनाकर आने के लिए कहा, बहुरूपिए ने राजा से निवेदन किया, कि महाराज आप शेर का रूप बनाने का आदेश न दें ! क्योंकि इस रूप में किसी व्यक्ति की हानि हो जाएगी। परन्तु इसके बाबजूद भी राजा नहीं माने, और कहा कि तुम्हें शेर का रूप ही बना कर आना है, तब बहुरूपिये ने कहा महाराज ! किसी मानव हानि को भी निश्चित रूप से सहन करना पड़ेगा। जब बहुरूपिया शेर का रूप बना कर आया तो फिर हुआ वही जो बहुरूपिए ने कहा था। उसने राजदरबार में एक कम उम्र के बालक को मार डाला, जो स्वयं राजा का बेटा था। किन्तु यह सब एक शर्त के मुताबिक था।

बहुरूपिए से राजा ने कहा, कि वह अब राजा याने (मुझको) उपदेश करे। उस वक्त उस बहुरूपिये के लिए यह बहुत कठिन स्थिति थी। क्योंकि किसी भी राजा को उपदेश देना किसी सामान्य व्यक्ति के वश की बात नहीं है। तब उस बहुरूपिये ने राजा से १५ दिन का समय माँगा।राजा ने उसे १५ दिन का समय दिया। बहुरूपिये ने मुनि का वेश धारण किया और पन्द्रह दिन के लिए उत्तम कोटि के विद्वजनों की शरण में जाकर कठिन साधना और सत्संग करने लगा। पन्द्रह दिन बाद मुनिके वेश में आकर उसने राजा को उपदेश उत्तम किया। अच्छी संगत के कारण वह स्वयं भी संत हो गया। उन मुनि महाराज की समाधि उ.प्र. के किसी स्थान पर स्थित है।





21. moral stories in hindi एक सेवा का मूल्य



          तुर्की में जकीर नाम के एक फकीर हुए हैं। वह आईन नदी के किनारे कुटी बनाकर रहते थे। एक दिन नदी में एक सेवा बहता आ रहा था। जकीन ने उसे पकड़ लिया।अभी उसे खाने की तैयारी कर ही रहे थे कि अंतःकरण से आवाज आई ‘‘फकीर! क्या यह तेरी संपत्ति है,क्या तूने इसे परिश्रम से पैदा किया है? यदि नहीं तो इसे खाने का तुझे क्या अधिकार है?’’सेव झोले में डालकर अब फकीर अब उसके स्वामी की खोज में नदी के चढ़ाव की ओर चल पड़े। 
          थोड़ी दूर पर एक सेव का बाग मिला। कुछ सेव के वृक्षों की डालें पानी को छू रही थीं,फकीर ने विश्वास किया सेव यहीं से टूटा हुआ होगा। उन्होंने बाग के स्वामी से कहा-यह लीजिए आपका सेव नदी में बहा जा रहा था।’’ उसने कहा-भाई मैं तो बाग का रखवाला मात्र हूँ,इसकी स्वामिनी तो बुखारा की राजकुमारी है।’’फकीर वहाँ से बुखारा के लिए रवाना हुआ। 
          कई दिन की पैदल यात्रा के बाद वहाँ पहुँचा और वह सेव लेकर राजकुमारी जी के पास उपस्थित हुआ। फकीर को एक सेव लेकर इस तरह आने का हाल सुनकर राजकुमारी हँसकर बोली-अरे बाबा! इसको वहीं खा लेते,एक सेव यहाँ लाने की क्या आवश्यकता थी?’’फकीर ने कहा-राजकुमारी जी आपकी दृष्टि में एक सेव का कुछ भी मूल्य नहीं पर इस सेव ने तो मेरा साधा धर्म,संयम और सारे जीवन की साधना नष्ट कर दी होती।’’

 



22. mora;l story- दादाजी के वचन


एक व्यक्ति ने व्यवसाय करने के लिए एक दुकान किराये पर ली और उसमें अपना व्यवसाय करने लगा । कुछ समय बाद लोगों ने उसे बताया कि यह दुकान पहले भी तीन बार किराये पर उठी, परन्तु कोई भी अपने व्यवसाय में सफल नहीं हुआ और उन्होंने दुखी होकर अपना धंधा बन्द कर दिया । सभी को घाटा हुआ है । व्यवसायी बहुत दु:खी हुआ । हताश होकर उसने यह बात अपने दादा जी को बताई। अत्यधिक निरुत्साहित हुए उस व्यवसायी को उसके दादा जी ने कहा कि तुम निश्चिन्त होकर अपनी दुकान चलाओ – पूरे उत्साह से, पूरी निष्ठा और नेक नियत से, व्यवसाय के उसूलों का पूरा ध्यान रखते हुए । दुकान बिलकुल भी अशुभ नहीं है । दादाजी की बात से वह अति उत्साहित हुआ और लग्न से अपनी दुकान का धंधा शुरू कर दिया। उसका व्यापार खूब फला फूला और बर्षों से वहीं पर अपना धंधा करता रहा है । दादा जी का एक-एक शब्द उस व्यवसायी के लिए देव वाणी की तरह सत्य बचन साबित हुए। दादाजी के वचन उसके लिए उनके आशीर्वचन थे।





23. सफलता का श्रेय- moral stories in hindi


          सफलता का श्रेय किसे इस प्रश्न पर एक दिन विवाद उठ खड़ा हुआ। ‘संकल्प’ ने अपने को,‘बल’ ने अपने को और ‘बुद्धि’ ने अपने को अधिक महत्त्वपूर्ण बताया। तीनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। अंत में तय हुआ कि ‘विवेक’ को पंच बना इस झगड़े का फैसला कराया जाए।तीनों को साथ लेकर विवेक चल पड़ा। उसने एक हाथ में लोहे की टेढ़ी कील ली और दूसरे में हथौड़ा। चलते-चलते वे लोग ऐसे स्थान पर पहुँचे जहाँ एक सुंदर बालक खेल रहा था। 
          विवेक ने बालक से कहा-बेटा इस टेढ़ी कील को अगर तुम हथौड़ा से ठोक कर सीधी कर दो तो मैं तुमको भरपेट मिठाई और खिलौने से भरी एक पिटारी भी दूँ।’’ बालक की आँखें चमक उठीं। वह बड़ी आशा और उत्साह से प्रयत्न करने लगा। पर कील को सीधा कर सकना दूर उससे हथौड़ा उठा तक नहीं। भारी औजार उठाने के लायक उसके हाथों में बल नहीं था। 
          बहुत प्रयत्न करने पर सफलता न मिली तो बालक खिन्न होकर चला गया। इससे उन लोगों ने निष्कर्ष निकाला कि सफलता प्राप्त करने को अकेला ‘संकल्प’ अपर्याप्त है।चारों आगे बढ़े तो थोड़ी दूर जाने पर एक श्रमिक दिखाई दिया। वह खर्राटे लेता हुआ सो रहा था। विवेक ने उसे झकझोर कर जगाया और कहा-इस कील को हथौड़ी मारकर सीधा कर दो मैं तुम्हें दस रुपया दूँगा।’’ उनींदी आँखों से श्रमिक ने कुछ प्रयत्न भी किया,पर वह नींद की खुमारी में बना रहा। उसने हथौड़ा एक ओर रख दिया और वहीं लेट फिर खर्राटे भरने लगा। निष्कर्ष निकला कि अकेला ‘बल’ भी काफी नहीं है। सामर्थ्य रखते हुए भी संकल्प न होने से श्रमिक जब कील को सीधा न कर सका तो इसके सिवाय और क्या कहा जा सकता था। विवेक ने कहा कि हमें लौट चलना चाहिए,क्योंकि जिस बात को हम जानना चाहते थे वह मालूम पड़ गई। संकल्प,बल और बुद्धि का सम्मिलित रूप ही सफलता का श्रेय प्राप्त कर सकता है। एकाकी रूप में आप लोग तीनों अधूरे-अपूर्ण हैं। 




24. moral stories in hindi मूर्ख सेवक


एक समय की बात है, एक राजा ने एक पालतू बन्दर को अपने सेवक के रूप में रखा हुआ था। जहाँ – जहाँ राजा जाता, वह बन्दर भी उसके साथ जाता। राजा के दरबार में उस बन्दर को राजा का पालतू होने के कारण कोई रोक – टोक नहीं थी। एक गर्मी के मौसम के दिन राजा अपने शयन पर विश्राम कर रहा था। वह बन्दर भी शयन के पास बैठ कर राजा को एक पंखे से हवा कर रहा था। तभी एक मक्खी आई और राजा की छाती पर आकर
बैठ गयी। जब बन्दर ने उस मक्खी को बैठा देखा तो उसने उसे उड़ाने का प्रयास किया। हर बार वो मक्खी उड़ती और थोड़ी देर बाद फिर राजा की छाती पर आ कर बैठ जाती। यह देख कर बन्दर गुस्से से लाल हो गया। गुस्से में उसने मक्खी को मारने की ठानी। फिर वो बन्दर मक्खी को मारने के लिए हथियार ढूडने लगा। कुछ दूर ही उसे राजा की तलवार दिखाई दी। उसने वो तलवार उठाई और गुस्से में मक्खी को मारने के लिए पूरे बल से तलवार राजा की छाती पर मार दी। इससे पहले की तलवार मक्खी को लगती, मक्खी वहाँ से उड़ गयी। बन्दर के बल से किये गए वार से मक्खी तो नहीं मरी मगर उससे राजा की मृत्यु अवश्य हो गयी।




25. moral stories in hindi- एक माली

एक माली एक माह के लिए किसी काम से शहर जानेवाला था। उसने एक माह के लिए बाग की देखभाल करने का काम अपने बेटे को सौंपते हुए समझाया कि बाग़ की ठीक से देखभाल करते रहना। ढोर बगीचे में न घुसने पाएं, पौधे, फूल-पत्तियां मुरझाने न पाएं। पानी बराबर देते रहना। देखभाल अच्छी तरह से करते रहना। बेटे को समझा कर माली चला गया।
एक माह बाद लौटा तो देख कर सन्न रह गया कि बाग़ के सारे पौधे सूख चुके थे, सारा बाग़ नष्ट होचुका था। उसने पुत्र से पूछा यह कैसे हो गया, तो पुत्र बोला कि मैं भी यह नहीं समझ पाया कि यह कैसे हो गया जबकि मैंने बड़ी अच्छी तरह से देखभाल की है। एक-एक पत्ती को रोज साफ करता रहा उन्हें पानी देता रहा फूलों की एक-एक पंखुड़ियों को बहुत प्यार से पानी से धोता रहा, उन्हें साफ़ रखता रहा, बड़ी सावधानी से देखभाल करता रहा, ढोर तो बाग़ में घुसे ही नहीं। फिर भी बाग़ सूखता गया और मेरी हैरानी और चिंता दिन दिन बढ़ती रही, मेरी मेहनत, मेरी साधना व्यर्थ चली गयी। माली सारी बात समझ कर बोला अरे मूर्ख! इतनी साधारण सी बात तेरी समझ में नहीं आई कि पानी फूल पत्तियों पर नहीं जड़ में डालते हैं। जड़ ही सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि जड़ से ही फूल पत्ती और पौधों को प्राण और ऊर्जा मिलती है। हर काम का संबंध उसके कारण से होता है। क्योंकि कारण ही जड़ है। जड़ (कारण) की उपेक्षा कर हम कार्य सिद्ध नहीं कर सकते। हमें पौधौं के साथ- साथ जड़ की फ़िक्र करनी चाहिए । पुत्र बोला जड़ तो मैंने कभी देखी ही नहीं, कभी जाना ही नहीं तो उसकी फ़िक्र कैसे कर सकता हूँ। माली बोला- इसी का नतीजा है कि तुमने इतनी मेहनत की और बाग़ सूख गया नष्ट हो गया है।

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